Nuvama ने बढ़ाया HFCL का टारगेट प्राइस, शेयर में मिल सकती है 53% तक की जोरदार तेजी

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टेलीकॉम उपकरण बनाने वाली कंपनी HFCL Ltd को लेकर ब्रोकरेज फर्म नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का रुख काफी सकारात्मक बना हुआ है। कंपनी के शानदार तिमाही नतीजों, रिकॉर्ड ऑर्डर बुक और बेहतर कारोबारी उम्मीदों के दम पर ब्रोकरेज ने इसके शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इस शेयर की कीमत में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है, हालांकि बाजार में कुछ जोखिम भी बने हुए हैं।

नुवामा ने एचएफसीएल के शेयर का नया टारगेट प्राइस 380 रुपये से बढ़ाकर 410 रुपये कर दिया है। यह नया लक्ष्य मौजूदा बाजार भाव से करीब 53 फीसदी ऊपर है, जो निवेशकों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। ब्रोकरेज ने इस मल्टीबैगर स्टॉक पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। इससे पहले भी यह शेयर इस साल जोरदार तेजी दर्ज कर चुका है। ब्रोकरेज का यह भरोसा मुख्य रूप से कंपनी के वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के बेहतरीन प्रदर्शन पर टिका है।

इस अवधि में कंपनी ने अपनी बिक्री से होने वाली कुल कमाई, कामकाजी मुनाफे और टैक्स के बाद बचने वाले शुद्ध मुनाफे के मामले में शानदार आंकड़े दर्ज किए हैं। इसे देखते हुए कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने राजस्व बढ़ाने के अनुमान को 40 फीसदी से बढ़ाकर 80 फीसदी से ज्यादा कर दिया है।

इसके अलावा, कंपनी ने वित्त वर्ष 2029 तक 10,000 करोड़ रुपये का कुल कारोबार हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसके समय से पहले पूरा होने की पूरी उम्मीद है। इन मजबूत आंकड़ों के चलते नुवामा ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए अपने कामकाजी मुनाफे के अनुमान में भी अच्छी बढ़ोतरी की है।

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो दूसरी तिमाही में इसका कुल कारोबार सालाना आधार पर 144 फीसदी बढ़ा है। इसमें टेलीकॉम प्रोडक्ट्स की बिक्री का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिसके आंकड़ों में पिछले साल के मुकाबले कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई।

उत्पाद बेचने की बेहतर कीमतों और अधिक मात्रा के कारण कंपनी का कामकाजी मुनाफा मार्जिन बढ़कर लगभग 24.8 फीसदी पर पहुंच गया। हालांकि, दूसरी तरफ टर्नकी अनुबंधों से जुड़े कारोबार में कुछ कमजोरी आई और इस सेगमेंट में कंपनी को घाटा उठाना पड़ा, जिस पर आगे भी नजर रखनी होगी।

एचएफसीएल के लिए सबसे बड़ी ताकत उसकी मजबूत ऑर्डर बुक है, जो बढ़कर रिकॉर्ड 28,900 करोड़ रुपये हो गई है। इस कुल ऑर्डर में 57 फीसदी हिस्सा विदेशी बाजारों से मिले ऑर्डर्स का है। इतनी बड़ी ऑर्डर बुक होने से कंपनी को आने वाले सालों में कारोबार मिलने की पूरी साफ तस्वीर मिलती है। इसके अलावा, कंपनी ने अपने कामकाज को बेहतर करते हुए उधार और पैसों के लेन-देन से जुड़े दिनों में सुधार किया है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।

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शानदार संभावनाओं के बावजूद इस कारोबार में कुछ जोखिम भी शामिल हैं। जानकारों के मुताबिक, यदि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा सेंटर से जुड़े खर्चों में कमी आती है, तो कंपनी की मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, कच्चे माल की उपलब्धता में दिक्कत और उत्पादन क्षमता को पूरी तरह से काम में लाने में होने वाली देरी जैसी चुनौतियां भी असर डाल सकती हैं। निवेशकों को इन सभी पहलुओं पर पैनी नजर रखनी चाहिए क्योंकि ब्रोकरेज का टारगेट प्राइस केवल एक अनुमान है।

Disclaimer: All the information provided in this article is for educational and infomational purposes only. We are NOT a SEBI registered investment advisor. DateUpdateGo always advises seeking guidance from a certified financial advisor before making any investment-related decisions.

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